उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक आदेश में कहा कि प्रदेश में फार्मासिस्ट पदों पर भर्ती के लिए केवल फार्मेसी में डिप्लोमा (डी.फार्मा) को ही वैध शैक्षणिक योग्यता के रूप में मान्यता दी जाएगी।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बी.फार्मा डिग्री धारक उम्मीदवार वर्तमान सेवा नियमों के तहत फार्मासिस्ट पद के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं हैं।
ओम प्रकाश, विनोद कुमार, पंकज मोहन ध्यानी तथा बी फार्मा डिग्री धारकों ने अपनी याचिकाओं में दलील दी थी कि चूंकि उनके पास उच्च योग्यता है इसलिए उन्हें फार्मासिस्ट पद के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार ने पहले उन्हें आश्वासन दिया था कि बी.फार्मा को मान्यता दी जाएगी लेकिन अभी तक नियमों में कोई संशोधन नहीं किया गया है।
न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की पीठ ने कहा कि भर्ती के लिए पात्रता मानदंड तय करना नीतिगत मामला है और जब तक सेवा नियमों में संशोधन नहीं किया जाता, तब तक राज्य फार्मेसी परिषद में पंजीकृत डी.फार्मा धारक ही फार्मासिस्ट पद पर भर्ती के लिए पात्र माने जाएंगे।
अदालत ने यह कहते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया कि अगर भविष्य में नियमों में बदलाव होता है, तभी बी फार्मा डिग्री धारक उसका लाभ ले सकते हैं।