अहमदाबाद। गुजरात के वस्त्रापुर स्थित अंधजन मंडल में “प्रज्ञाचक्षु टेलेन्ट सर्च” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें गुजरात के सुप्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी मगनभाई पटेल मुख्य अतिथि एवं मुख्य स्पॉन्सर के रूप में उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम में विजयी हुए 60 दृष्टिबाधित बच्चों को नकद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया, ताकि वे अपने दैनिक खर्च में सहायता कर सकें।इस “प्रज्ञाचक्षु टेलेंट सर्च” कार्यक्रम का उद्देश्य प्रज्ञाचक्षु बाल कलाकारों की गायन और संगीत प्रतिभा को बाहर लाना और उन्हें प्रोत्साहित करना था।
मगनभाई पटेल ने दो दिनों तक इस कार्यक्रम में भाग लिया और पुरस्कार प्रदान दिन पर अपने उदबोधन में कहा “अंधजन मंडल, वस्त्रापुर के साथ मेरा कई वर्षों से घनिष्ठ संबंध रहा है। इस संस्था के स्थापक पद्मश्री स्वर्गीय प्रज्ञाचक्षु जगदीशभाई पटेल मेरे अंगत मित्र और गुजरात के प्रथम प्रज्ञाचक्षु फ़िज़ियोथेरेपिस्ट थे उनके अथाग परिश्रम और प्रयासों के कारण आज अंधजन मंडल न केवल गुजरात में बल्कि देश और दुनिया में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए एक अग्रणी संस्था बन गई है। जब मैं लायन्स डिस्ट्रिक्ट 323-बी (आज बी1,बी2,बी3,बी4) में जॉन चेयरमैन, रीजन चेयरमैन जैसे पदों पर था, तब वर्षों पहले इस संस्था में एक ब्रेललिपि प्रेस मशीन आई थी और उसके उद्घाटन समारोह में मेरे साथ प्रसिद्ध कथावाचक रमेशभाई ओझा (भाई श्री), संस्था के संस्थापक पद्मश्री स्वर्गीय प्रज्ञाचक्षु जगदीशभाई पटेल और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। मुझे इस संस्था के पूर्व प्रमुख पीयूषभाई देसाई (चेरमेन-वाघ बकरी चाय) के साथ भी कई वर्षों तक काम करने का अवसर मिला है, जिसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। स्वर्गीय भद्राबेन सत्या जो एक उद्योगपति की बेटी थी और उन्होंने प्रज्ञाचक्षु स्व. जगदीशभाई पटेल की सेवाकिय भावना से प्रभावित होकर उनसे शादी की और उनके साथ रहकर कई वर्षो तक प्रज्ञाचक्षु लोगो की सेवा की।स्वर्गीय भद्राबेन सत्या के भाई और मेरे मित्र चंद्रवदन सत्या के साथ भी मुझे कई वर्षो तक काम करने का अवसर मिला है।
मगनभाई पटेल ने इस संस्था से जुड़े अपने अनुभव बताते हुए आगे कहा की लायन्स क्लब ऑफ़ वस्त्रापुर के पूर्व प्रमुख और मेरे मित्र दिनेशभाई महेता (आयु करीब 80 साल, बी.ई.मिकेनिकल और बी.ई.इलेक्ट्रिकल) जो अहमदाबाद की बड़ी टेक्सटाइल मिल में चीफ इंजीनियर थे और वे अहमदाबाद, गुजरात की सोला भागवत विद्यापीठ के स्थापक कृष्णशंकर शास्त्रीजी के जमाई है उनके साथ मुझे कई वर्षो तक काम करने का अवसर प्राप्त हुआ, दिनेशभाई महेता भागवत विद्यापीठ के का कार्यभार संभालते हुए सेवाकार्यो का एक मैगज़ीन भी निकालते थे जिसमे में अपना आर्थिक सहयोग देकर उनके साथ कई सालो तक काम करने का अवसर मिला जिसे मै अपना सौभाग्य मानता हूं। दिनेशभाई महेता के पुत्र गिर्वाणभाई महेता लायन्स क्लब में प्रथम वाइस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर पद पर रहकर लायन्स क्लब के सामाजिक कार्यो एव सोला भागवत विद्यापीठ से भी जुड़े हुए है।
मगनभाई पटेल ने सोला भागवत विद्यापीठ के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा की साल 2007 में अहमदाबाद, गुजरात के एस.जी. रॉड जैसे पॉश एरिया में करीब 200 एकड़ जमीन पर सेवा, संस्कार और शिक्षा प्रदान करनेवाली संस्था “सोला भागवत विद्यापीठ” जिसके स्थापक श्री कृष्णशंकर शास्त्रीजी जिन्होंने बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम, गौशाला, आई.टी.आई प्रशिक्षण केंद्र, संस्कृत में उच्चतम डिग्री पाठ्यक्रम, सांस्कृतिक रूप से व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्था, संतों के लिए तीर्थ स्थल, बीमारों के लिए उपचार स्थल इत्यादि गतिविधियों का निर्माण किया और आज यह संस्कार एव शिक्षा का केंद्र देश और दुनिया में अद्वितीय बन चूका है। पू.शास्त्रीजी के पुत्र का एक मार्ग अकस्मात में निधन होने के बाद पू.शास्त्रीजी के पौत्र श्री भागवत ऋषिजी इस संस्था का कार्य संभाल रहे है, जिन के साथ रहकर मुझे भी कईबार इस संस्था को आर्थिक सहयोग प्रदान करने का अवसर प्राप्त हुआ है जो मेरा सौभाग्य है। आज उनके नेतृत्व में इस मंदिर परिसर में करीब हजारो से भी अधिक छात्र हिन्दी एव संस्कृत भाषा में शिक्षा प्राप्त कर के कथावाचक और कर्मकांड जैसे अभ्यासक्रमो में स्नातक और अनुस्नातक जैसी मास्टर डिग्री प्राप्त कर के पुरे देश में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में हिन्दू संस्कृति का प्रचार कर रहे है जो हमारे लिए बड़े गौरव की बात है। इस संस्था के साथ काम करते करते इस संस्था के ट्रस्टी गुजरात राज्य के भूतपूर्व चीफ सचिव पीके लहरी साहब के साथ रहकर कईबार मुझे इस संस्था को आर्थिक सहयोग प्रदान कर के सेवा करने का जो अवसर प्राप्त हुआ है जिसे मै अपना सौभाग्य मानता हूं। यह विशाल परिसर अहमदाबाद, गुजरात के ऐसे लोकेशन पर है जिसकी बाजार कीमत आज तकरीबन 5000 करोड़ जितनी है। इस विशाल परिसर में भगवान श्रीनाथजी, श्री कृष्ण, शंकर-पार्वती, राम-सीता और हनुमानजी जैसे हिन्दू देवी-देवताओ की भव्य प्रतिमावाले मंदिर भी स्थापित है और त्यौहार के दिन धार्मिक एव सांस्कृतिक मेले भी आयोजित की जाते है जिसका लाभ मंदिर में दर्शन करने हेतु आनेवाले हजारो भाविक भक्त को मिलता है। अपनी गतिविधियों को अहमदाबाद, गुजरात तक सीमित न रखते हुए, विभिन्न संगठनों के माध्यम से मुंबई, चंपारण, रामेश्वर और यहां तक कि विदेशों में भी अपनी सेवाओं का विस्तार किया है, जिसके माध्यम से इसकी खुशबू पूरे विश्व में फैल गई है।
मगनभाई पटेलने गुजरात राज्य के भूतपूर्व चीफ सचिव पीके लहरी साहब के साथ काम करने के अपने अनुभव बताते हुए कहा की गुजरात के सौराष्ट्र के वेरावल स्थित देश के सुप्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव का मंदिर है जिसके प्रथम चेरमेन देश के लौहपुरुह सरदार वल्लभभाई पटेल रह चुके है और आज इस ट्रस्ट के चेरमेन हमारे सम्मानीय प्रधानमंत्री नरेन्द्रभाई मोदी साहब, ट्रस्टीगण मे लालकृष्ण आडवाणी जी, हमारे गृहमंत्री अमितभाई शाह साहब और गुजरात राज्य के भूतपूर्व चीफ सचिव पीके लहरी साहब ट्रस्टी के रूप में विद्यमान है जिनके साथ मुझे आज भी सेवाकार्यो में सहभागी होने का अवसर प्राप्त हो रहा है। आज देश ही नहीं पूरी दुनियाभर से लाखो की तादात में लोग सोमनाथ मंदिर में दर्शन करने आते है। गुजरात के इस पवित्र यात्राधाम को भारत सरकार के टूरिज़म मंत्रालयने इस क्षेत्र का विकास कर के आज इसे आध्यात्मिक एव आर्थिक रूप से विश्व फलक पर रख दिया है। आज इस पवित्र यात्राधाम के विकास के साथ-साथ इस क्षेत्र के हजारो लोगो को अपने विभिन्न व्यवसायों में रोजगारी भी प्राप्त हो रही है। पूर्णिमा के दिन यहाँ पर स्वर्ग जैसी अनुभूति होती है। स्वच्छता और इंफ्रास्ट्रक्चर में यह धार्मिक स्थल देश में प्रथम क्रमांक पर है।
सोमनाथ मंदिर से थोड़ी दूर पर श्री उमिया माताजी मंदिर ट्रस्ट, सिदसर, ता.जामजोधपुर, जी.राजकोट, गुजरात द्वारा संचालित श्री उमिया माताजी का मंदिर एव एक हॉस्टल का भी निर्माण हुआ है, इस हॉस्टल में करीब 40 जितने पांच सितारा होटल जैसे AC एव NON AC रूम है। यहाँ मंदिर में दर्शन करने आनेवाले यात्रिको के लिए बहुत ही न्यूनतम दर पर रूम उपलब्ध कराये जाते है और भोजन की सुविधा भी दी जाती है। इस हॉस्टल की हेड ऑफिस गुजरात के राजकोट जिले में आयी हुई है। ऐसी ही एक हॉस्टल गुजरात के द्वारका मंदिर के पास भी बनाई गयी है जहा करीब 50 जितने पांच सितारा होटल जैसे AC एव NON AC रूम है, यहाँ पर भी यात्रिको के लिए बहुत ही न्यूनतम दर पर रूम उपलब्ध कराये जाते है और भोजन की सुविधा भी दी जाती है। मगनभाई पटेल यह दोनो संस्थाओ में ट्रस्टी एव डोनर के रूप में आज भी सेवा दे रहे है।
विशाल समुद्र तट पर स्थापित इस सोमनाथ मंदिर से करीब 56 किलोमीटर की दूरी पर “गिर सफारी पार्क” भी आया हुआ है जिसमे सिंह दर्शन के लिए पूरे देश और विश्वभर से लाखों की तादात में लोग आते है। आज यह “गिर सफारी पार्क” दुनिया का सब से बड़ा टूरिज़म सेन्टर बन चूका है । यहाँ बताना आवश्यक है की हर श्रावण माह एव शिवरात्रि जैसे पवित्र त्योहारों में अशोक महाराज एव अन्य ब्राह्मण द्वारा सोमनाथ मंदिर में मगनभाई पटेल के परिवार द्वारा हर साल पूजा अर्चना कराई जाती है और यथाशक्ति दक्षिणा भी ब्राह्मणो को इस परिवार द्वारा दी जाती है साथ ही साथ पूजा के पवित्र जल से फेक्टरी एव ऑफिस में छींटकाव किया जाता है।
दृष्टिबाधित बच्चों के इस टेलेंट सर्च कायक्रम के लिए मैं संस्था के प्रमुख श्री राजेंद्रभाई शाह, सचिव श्री भूषणभाई पूनाणीऔर संस्था के मैनेजर जयंतीभाई पंचाल को बधाई देता हूं। मैं ईश्वर से इस संस्था के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं ताकि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कर बाल कलाकारों की प्रतिभा को देश और दुनिया के सामने लाया जा सके।
इस कार्यक्रम में बालगीत, फिल्मी गीत और सुगम संगीत जैसी केटेगरी रखी गई थी। इस कार्यक्रम में प्राथमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के लगभग 175 दृष्टिबाधित बच्चोंने भाग लिया था, जिनमें से 60 बच्चों को विजेता घोषित किया गया तथा प्रत्येक बच्चे को उनका उत्साह बढ़ाने के लिए मगनभाई पटेलने अपने डोनेशन से नकद पुरस्कार का लिफाफा दिया।इस कार्यक्रम में संस्था के प्रबंधक जयंतीभाई पंचाल, संस्था के आचार्य मनुभाई चौधरी व दिनेशभाई पंड्या, वस्त्रापुर लायंस क्लब के प्रमुख चंद्रकांत सोलंकी, उपप्रमुख धनजीभाई सोलंकी, कैबिनेट पदाधिकारी योमेश जानी, विक्रमसिंह चौहान, पूर्व प्रमुख प्रज्ञाचक्षु तारकभाई लुहार उपस्थित थे।
इस संस्था मे लगभग 300 दृष्टिबाधित बच्चे, 150 मानसिक रूप से विकलांग बच्चे तथा अन्य मिलाकर करीब 800 दृष्टिबाधित बच्चों को प्रशिक्षण, शिक्षा, वाक् एवं श्रवण चिकित्सा जैसी विभिन्न गतिविधियां प्रदान की जाती है। आज इस संस्था में स्कूल, प्रशिक्षण संस्थान, रोजगारोन्मुखी केन्द्र इत्यादि जैसी प्रवृतिया चल रही है। इस संस्थान के दृष्टिबाधित बच्चों द्वारा बनाई गई विभिन्न वस्तुओं की बिक्री के लिए संस्थान परिसर में एक विक्रय केन्द्र भी कार्यरत है, जिसमें लकड़ी के फर्नीचर, सजावटी वस्तुएं, विभिन्न कलात्मक हौजरी जैसी अनेक घरेलू वस्तुएं बहुत ही उचित दरों पर बेची जाती हैं। यहां रक्षाबंधन और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान दीपक, फुटक्लॉथ और अन्य गृह सजावटी सामान बेचे जाते हैं।
अंधजन मंडल, वस्त्रापुर भारत का सबसे बड़ा NGO है जो सभी प्रकार की विकलांगताओंवाले व्यक्तियों के लिए सेवाओं की एक संपूर्ण श्रृंखला से कार्यरत है। इस संस्था के गुजरात में 15 और राजस्थान में 1 परिसर है, इसके अलावा 13 दृष्टि केंद्र और 10 डे-केयर सेंटर हैं जो बहु-विकलांगता और बधिरता से ग्रस्त व्यक्तियों की सेवा करते हैं।
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