राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को जनसांख्यिकीय असंतुलन के पीछे धर्मांतरण और अवैध प्रवास को प्रमुख कारण बताया और कहा कि सरकार अवैध प्रवास को रोकने का प्रयास कर रही है, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
भागवत ने यह भी कहा कि नौकरियां अवैध प्रवासियों को नहीं बल्कि अपने लोगों को मिलनी चाहिए जिनमें मुस्लिम शामिल हैं।’’
आरएसएस के सौ साल होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में भागवत ने कहा कि धर्म व्यक्तिगत पसंद का विषय है और इसमें किसी प्रकार का प्रलोभन या जोर-जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।
भागवत ने कहा, धर्म व्यक्ति की अपनी पसंद है। किसी का भी जबरन धर्मांतरण नहीं कराया जाना चाहिए। हमें इसे रोकना होगा। दूसरा मुद्दा घुसपैठ का है। हर देश के अपने नियम-कानून और सीमित संसाधन होते हैं। इसलिए घुसपैठ रोकी जानी चाहिए और सरकार इसे रोकने के लिए प्रयास कर रही है… हमारे देश के नागरिकों को रोजगार देना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, धर्मांतरण और अवैध प्रवास जनसांख्यिकीय असंतुलन के प्रमुख कारण हैं। हमें अवैध प्रवासियों को नौकरी नहीं देनी चाहिए; हमें मुसलमानों सहित अपने लोगों को नौकरी देनी चाहिए।
आरएसएस सरसंघचालक से अवैध घुसपैठ पर संघ के विचार पूछे गए। उन्होंने कहा, सरकार अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण की कोशिश कर रही है, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। धर्म व्यक्तिगत पसंद का विषय है; इसमें किसी तरह का प्रलोभन या जोर-जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, हर देश के अपने नियम और कानून होते हैं। दुनिया कुटुम्ब है, लेकिन हर जगह के अपने मानक होते हैं। स्वतंत्रता अनुशासन भी है…देश में अवैध प्रवासियों को अनुमति न देना वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा के विपरीत नहीं है।