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फर्जी नियुक्तियों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं

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शासन को लिखित पत्र, मंत्री और मुख्यमंत्री को प्रतिलिपि भेजी

शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा को ईमेल पत्र भेजकर मेरठ नगर निगम में अवैध नियुक्त कर्मचारी राजेश पुत्र पारसनाथ को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है। रविकांत ने कहा कि अगर सरकार कानून के आदेशों की भी अवहेलना करेगी तो जनआंदोलन अवश्यंभावी होगा।

मेरठ। मेरठ नगर निगम में भ्रष्टाचार और फर्जी नियुक्तियों का जिन्न फिर बाहर आ गया है। एक ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट अवैध नियुक्त कर्मचारियों पर कार्रवाई के स्पष्ट आदेश दे चुका है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं फर्जी कर्मचारियों के संरक्षण में अब जनप्रतिनिधियों पर भी हमले होने लगे हैं।



ताजा मामला नगर निगम में नियुक्त राजेश पुत्र पारसनाथ का है, जो दो गंभीर आपराधिक मामलों में पहले से आरोपित है, और अब एक दलित पार्षद पर जानलेवा हमले का भी आरोप उस पर लगा है। यह बाबू मेरठ नगर निगम में फर्जी ढंग से नियुक्त हुआ था और इसके खिलाफ थाना दिल्ली गेट में FIR संख्या 70/24 व 71/24 दर्ज हैं।

“5000 रुपये महीना दे, वरना…” – दलित पार्षद से वसूली की मांग
घटना दिनांक 10 अप्रैल 2025 की है जब दलित पार्षद रविंद्र सिंह जाटव शिकायत लेकर सूरजकुंड वाहन डिपो पहुंचे। वहां बाबू राजेश ने खुलेआम उनसे रिश्वत की मांग की और मना करने पर करीब 20 गुंडों के साथ जानलेवा हमला किया।

हाईकोर्ट ने जनवरी 2025 में आदेश दिया था कि तीन महीने के भीतर इन अवैध नियुक्तियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन 22 अवैध बाबुओं में से किसी एक पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इन सबमें सबसे विवादित नाम राजेश का है, जिसने पहले भी 2017 में एक दलित व्यक्ति पर कातिलाना हमला कर जेल यात्रा की थी (FIR संख्या 365/17, थाना भावनपुर)।

बिना योग्यता, फर्जी नियुक्तियों की फ़ेहरिस्त
राजेश पुत्र पारसनाथ समेत 22 अवैध नियुक्तियाँ

थाना दिल्ली गेट में दो FIR – 70/24 व 71/24

हाईकोर्ट ने जनवरी 2025 में 3 महीने में कार्रवाई का दिया था आदेश

आज तक एक भी कदम नहीं उठाया गया

राजेश की कुंडली – आपराधिक, भ्रष्ट, दबंग
2017 में दलित व्यक्ति पर कातिलाना हमला, जेल जा चुका है
FIR संख्या: 365/17, थाना भावनपुर

सरकारी तनख्वाह में अकूत संपत्ति, आलीशान बंगले, महंगी गाड़ियाँ

स्थानीय लोगों में खौफ का पर्याय, पुलिस पर भी सवाल

👁️‍🗨️ क्यों डर रहा प्रशासन?
जब हाईकोर्ट तक आदेश दे चुका हो और FIR भी दर्ज हों, तब

क्यों नहीं हुई गिरफ्तारी?

क्यों चुप है मेरठ पुलिस?

क्या कोई बड़ा राजनीतिक संरक्षण?

शहर के कई सामाजिक संगठनों ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि आखिर बाबू राजेश जैसे लोगों की नौकरी बहाल कैसे हुई? और इतनी संगीन घटनाओं के बाद भी उसे बचाया क्यों जा रहा है?

अब 10 अप्रैल 2025 को पार्षद रविंद्र सिंह जाटव, जो मेरठ के वार्ड पार्षद हैं, जब एक जनसमस्या लेकर नगर निगम के वाहन डिपो में पहुंचे, तो राजेश ने उनसे ₹5000 प्रति माह की रिश्वत की मांग की। जब पार्षद ने इसका विरोध किया तो उसने करीब 20 लोगों को बुलाकर उन पर जानलेवा हमला करवा दिया।

हमले में पार्षद के सिर पर गंभीर चोट आई, कान का पर्दा फट गया और हाथ भी टूट गया। इस पूरी घटना का वीडियो तक बनाया गया और उसे वायरल किया गया। इस समय पार्षद मेडिकल कॉलेज मेरठ के ICU में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि घटना की शिकायत थाना सिविल लाइंस में दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है।

इस पूरे मामले को उजागर करते हुए शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा को ईमेल पत्र भेजकर बाबू राजेश की तत्काल बर्खास्तगी और उस पर कार्रवाई की मांग की है।

रविकांत ने कहा कि यह हमला जानबूझकर पार्षद पर करवाया गया ताकि हाईकोर्ट के आदेशों से ध्यान भटकाया जा सके। “अगर अब भी मेरठ नगर आयुक्त ने कार्रवाई नहीं की तो शोषित क्रांति दल सड़कों पर उतरकर मोर्चा संभालेगा।”

उन्होंने मुख्यमंत्री को भी प्रतिलिपि भेजते हुए चेताया कि यदि कानून और अदालत के आदेशों को इसी तरह दरकिनार किया गया, तो यह केवल नगर निगम की नहीं, पूरे शासन तंत्र की नाकामी होगी।

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