राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने सुनीं पीड़ित महिलाओं की समस्याएं
कहा – अब महिलाओं को आयोग के पास नहीं जाना होगा, आयोग खुद पहुंचेगा पीड़ितों तक

मेरठ : राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर के नेतृत्व में गुरुवार को विकास भवन सभागार में महिला जनसुनवाई का आयोजन हुआ। इस जनसुनवाई में आयोग की सदस्यों ने तीन वर्षों से लंबित महिला उत्पीड़न संबंधी मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
जनसुनवाई में विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने अपनी पीड़ा साझा की। सबसे गंभीर मामला रजनी नामक महिला ने रखा, जो मूलतः जालंधर (पंजाब) की रहने वाली है। रजनी ने बताया कि उसकी शादी 10 वर्ष पूर्व मेरठ के हनुमानपुरी, सिविल लाइन क्षेत्र में हुई थी। विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष दहेज की मांग को लेकर उत्पीड़न करने लगा। रजनी ने आरोप लगाया कि उसके पति अमित के कई पुरुषों से समलैंगिक संबंध हैं, और जब उसने विरोध किया तो उसे बुरी तरह मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2024 में उसके पति और जेठ ने उसे जालंधर में मायके के घर से जबरन मारपीट कर बाहर निकाल दिया और उसका पुत्र आरज (जन्म: 2016) उठाकर ले गए। रजनी का दावा है कि उसे न तो अब तक अपने बेटे से मिलने दिया गया और न ही बताया गया कि वह कहां है। उसने मेरठ एसएसपी समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
रजनी ने आयोग के सामने भावुक होकर कहा – “अगर मुझे अब भी न्याय नहीं मिला, तो मैं अपनी जीवन लीला समाप्त कर लूंगी।” उसकी इस पीड़ा को सुनकर आयोग की अध्यक्ष व सदस्यों ने उसे निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इसी जनसुनवाई में परतापुर क्षेत्र के एक रिक्शा चालक महेश ने भी आयोग को बताया कि उसकी बेटी की शादी एक वर्ष पहले हुई थी। शादी के बाद पता चला कि लड़के वालों ने कई बातें छिपाई थीं। पीड़िता का आरोप है कि उसका ससुर उसके साथ अश्लील हरकतें करता है। मामले की शिकायत थाना परतापुर और एसएसपी मेरठ से की जा चुकी है, लेकिन कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।
इस मौके पर जिला अधिकारी डॉ. वीके सिंह, सीडीओ नूपुर गोयल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान, राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुश्री डेलिना खोंगडुप, डॉ. हिमानी अग्रवाल और डॉ. मीनाक्षी भराला सहित पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा, “अब महिलाओं को आयोग तक आने की जरूरत नहीं, आयोग स्वयं पीड़ितों तक पहुंचेगा। महिलाओं की समस्याओं का समाधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।