तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने शुक्रवार को विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर केंद्र-राज्य संबंधों पर उनकी सरकार द्वारा गठित एक समिति की प्रश्नावली पर उनके विचार मांगे।
पत्र की एक प्रति मीडिया को साझा की गई है, जिसमें स्टालिन ने कहा कि लगातार संविधान संशोधनों के कारण केंद्रीय कानूनों और केंद्रीय नीतियों ने शक्तियों का नाजुक संतुलन धीरे-धीरे केंद्र सरकार के पक्ष में झुका दिया है।
उन्होंने पत्र में कहा, केंद्रीय स्तर पर बड़े मंत्रालय मौजूद हैं जो राज्य के कार्यों की नकल करते हैं और वित्त आयोग के अनुदानों से जुड़ी शर्तों, केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए एक समान दिशा-निर्देशों, कार्य-दर-कार्य अनिवार्य अनुमोदनों और कार्यान्वयन के सूक्ष्म प्रबंधन के माध्यम से राज्य की प्राथमिकताओं को प्रभावित करते हैं या उन पर हुक्म चलाते हैं।
उन्होंने कहा, आज हम एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। समय की मांग है कि इन घटनाक्रम का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और भविष्य का एक ऐसा ढांचा तैयार किया जाए जो सच्चे संघवाद को मजबूत करे।
केंद्र-राज्य संबंधों पर उनकी सरकार द्वारा गठित और उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति का उल्लेख करते हुए स्टालिन ने कहा कि भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के. अशोक वर्धन शेट्टी और तमिलनाडु योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एम. नागनाथन इस समिति के सदस्य हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्रियों और नेताओं से इस पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने तथा संबंधित विभागों को प्रश्नावली पर गौर करने तथा विस्तृत उत्तर के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया।
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