तेलंगाना के मेडक जिले में बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिसके कारण बाढ़ ने शहरों, गांवों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को जलमग्न हो चुके हैं. अकनपेट-मेडक रेलवे खंड में गंभीर क्षति की खबर सामने आई है, जहां बाढ़ के पानी ने रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी और बजरी को पूरी तरह बहा दिया. इस घटना के कारण इस मार्ग पर रेल सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं. साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मेडक-काचिगुड़ा और बोधन-काचिगुड़ा जैसी प्रमुख रेल सेवाओं को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. रेलवे ने मॉनसून-विशेष मरम्मत टीमें तैनात की हैं, जो क्षतिग्रस्त ट्रैक की मरम्मत के लिए दिन-रात काम कर रही हैं.
पिछले 50 वर्षों में सबसे भारी बारिश के रूप में वर्णित इस मूसलाधार बारिश ने मेडक और पड़ोसी कामरेड्डी जिलों के निचले इलाकों को पूरी तरह डुबो दिया है. मंजीरा नदी अपनी क्षमता से अधिक उफान पर है और इसके किनारे टूटने से हवेली घनपुर, रामायमपेट और शंकरमपेट जैसे क्षेत्रों में घरों और कृषि क्षेत्रों में पानी भर गया है. मेडक के धूप सिंह थांडा में बाढ़ के पानी ने पूरे गांव को घेर लिया, जिसके कारण निवासियों को अपनी जान बचाने के लिए छतों पर शरण लेनी पड़ी. हवेलीघनपुर मंडल में नक्कावागु नाले में एक कार बह गई, लेकिन स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) ने चालक को सुरक्षित बचा लिया.
500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
मेडक और कामरेड्डी जिलों में अब तक 500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. राहत और बचाव कार्यों में 15 SDRF टीमें, पांच नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) इकाइयां और हैदराबाद की TASA यूनिट के 100 सैनिक दिन-रात जुटे हुए हैं. रामायमपेट में SC महिला डिग्री कॉलेज हॉस्टल से 350 छात्राओं और SC & ST वेलफेयर हॉस्टल से 80 अन्य लोगों को सुरक्षित निकाला गया. हालांकि, इस आपदा में कम से कम तीन लोगों की जान चली गई है, जिसमें कामरेड्डी में एक दीवार गिरने से एक व्यक्ति की मौत और दो अन्य लोग बाढ़ के पानी में बह गए.
IMD ने जारी किया रेड अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मेडक, कामरेड्डी और आसपास के जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. हवेलीघनपुर में 24 घंटों में 31.6 सेमी बारिश दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र के लिए असाधारण है. मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 28 अगस्त को प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और जिला अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए. राज्य सचिवालय में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जो स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है. संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त NDRF और SDRF टीमें तैनात की गई हैं.
सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित
बाढ़ ने सड़क यातायात को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. मेडक के नरसिंगी में राष्ट्रीय राजमार्ग 44 जलमग्न हो गया, जिसके कारण सैकड़ों वाहन फंस गए. जिले भर में 47 सड़कें, 23 पुलिया और 15 पुल बंद कर दिए गए हैं. किसानों को भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि मक्का और सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे करोड़ों रुपये की क्षति का अनुमान है.
लंगाना सरकार की लोगों से अपील
बचाव कार्य जारी हैं और तेलंगाना सरकार ने निवासियों से घरों में रहने और यात्रा से बचने की अपील की है. मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों को तैनात किया गया है. पोचारम जलाशय में पानी के प्रवाह में कमी के संकेत राहत की उम्मीद जगा रहे हैं. हालांकि, अगले कुछ दिनों में और बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है. रेल यात्रियों के लिए SCR ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं: सिकंदराबाद (040-27786170), काचिगुड़ा (9063318082), और कामरेड्डी (040-27783867). बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य होने तक सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.
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