उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के कारण तबाही मचने के एक दिन बाद शनिवार को सुबह होते ही बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में जुट गए।
शुक्रवार तड़के चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और टिहरी जिलों में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने से छह लोगों की मौत हो गई और 11 लापता हो गए।
टूटी सड़कों के कारण शुक्रवार को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (डीडीआरएफ) के कर्मियों के दलों को प्रभावित इलाकों में पहुंचने में देर हुई।
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हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को चमोली और रुद्रप्रयाग में मौसम में सुधार होने के साथ ही खोज एवं बचाव कार्यों में तेजी आने की संभावना है।
चेनागाड़ बाजार क्षेत्र में घुटनों तक मलबा इकट्ठा हो गया है, जहां आपदा में 10 से ज्यादा दुकानें और ढाबे पूरी तरह बह गए। सड़कें भी टूट गई हैं। रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन ने कहा, हमारा ध्यान प्रभावित क्षेत्र तक सड़क मार्ग बहाल करने पर है ताकि मलबा हटाने के लिए भारी मशीनें वहां भेजी जा सकें।
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उन्होंने कहा कि भारी मशीनरी के अभाव में मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचना बहुत मुश्किल होगा।
रुद्रप्रयाग के बारिश से तबाह हुए इलाकों में आठ लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि बागेश्वर जिले में तीन लोगों का पता नहीं चल पाया है।
चमोली, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में शुक्रवार को पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि देहरादून में एक नदी से 10 साल के लड़के का शव बरामद किया गया।
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