अगस्त 2021 में पहली बार ऐसा हुआ जब एक ही बार में तीन महिला जज सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त की गई। उस समय जस्टिस हीमा कोहली, बीवी नागरत्ना और बेला त्रिवेदी के आने से सुप्रीम कोर्ट में पहली बार कुल चार महिला जज एक साथ बैठीं। इनमें जस्टिस इंदिरा बनर्जी पहले से मौजूद थीं। उस वक़्त कोलेजियम की सिफ़ारिश और सरकार की तुरंत मंजूरी, दोनों को हिस्टोरिक मोमेंट कहा गया। वजह ये थी कि अब तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ आठ महिला जज ही बनी थीं। 2021 के अब तक तीन मुख्य न्यायधीश सीजेआई यूयू ललित, डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना आकर विदा हो चुके हैं। महिलाओं की खूब भागीदारी की बातें हुई। लेकिन इनकी अवधि में एक भी महिला सुप्रीम कोर्ट में नहीं लाई गई। आज की तारीख में सुप्रीम कोर्ट के 32 जजों में सिर्फ एक महिला जज जस्टिस बीवी नागरत्ना हैं। अब जस्टिस बीआर गवई का कार्यकाल भी उसी रास्ते पर जाता दिख रहा है। ये सबसे साफ कॉलेजियम मीटिंग में सामने आया।
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कॉलोजियम सिस्टम मतलब जजों के अप्वाइंटमेंट पर फैसला लेने वाला सिस्टम जिसमें जज आपस में मीटिंग करते हैं। वोट करते हैं और फैसला करते हैं। वो सिस्टम जिसमें सरकार से कोई लेना देना नहीं होता है। मतलब सुप्रीम कोर्ट के बड़े जज बैठकर तय करते हैं कि नया जज कौन बनेगा। हाई कोर्ट के किस जिस्टिस को प्रमोट कर सुप्रीम कोर्ट में लाया जाएगा। कुछ ऐसे हीऔर फैसले। कॉलेजियम सिस्टम को लेकर ऐसे ही काफ बातें चलती रहती हैं। फिलहाल इसकी चर्चा हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कॉलोजियम सिस्टम को लेकर हाल ही में एक फैसला हुआ। जिसके बाद हंगामा बरपा है।
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केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस आलोक अराधे और पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट कलीजियम की सिफारिश के दो दिन बाद नोटिफिकेशन जारी किया गया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर पोस्ट किया कि राष्ट्रपति ने भारत के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जस्टिस अराधे और जस्टिस पंचोली को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने को कहा है।’ अब इन नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या फिर से पूरी 34 हो जाएगी। हालांकि, जस्टिस पंचोली की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कलीजियम की बैठक में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने उनके नाम का विरोध किया था। बताया जाता है कि उन्होंने उनकी ऑल इंडिया सीनियॉरिटी में कम रैंक का हवाला दिया। साथ ही 2023 में उन्हें गुजरात हाई कोर्ट से पटना हाई कोर्ट ट्रांसफर किए जाने के कारणों पर भी सवाल उठाए थे।
जस्टिस पंचोली को लेकर क्या है आपत्ति?
जस्टिस विपुल पंचोली के प्रमोशन पर जस्टिस बीवी नागरत्ना को आपत्ति है। उनका कहना है कि जस्टिस पंचोली की नियुक्ति न्याय प्रशासन के लिए प्रतिकूल होगी और कॉलेजियम प्रणाली की विश्वसनीयता को खतरे में डालेगी। जस्टिस बीवी नागरत्ना चीफ जस्टिस भूषण आर गवई की अध्यक्षता वाले पांच न्यायाधीशों के कॉलेजियम की एकमात्र महिला सदस्य हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना के अलावा कॉलेजियम में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी शामिल हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना की आपत्ति का केंद्र न्यायमूर्ति पंचोली का गुजरात हाई कोर्ट से पटना हाई कोर्ट में स्थानांतरण रहा है। जस्टिस पंचोली का ट्रांसफर जुलाई 2023 में हुआ था। जस्टिस नागरत्ना ने इसे एक सुविचारित विचार-विमर्श का परिणाम बताया। रिपोर्टों के अनुसार, न्यायमूर्ति नागरत्ना के नोट से संकेत मिलता है कि जस्टिस पंचोली हार्ट कोर्ट के न्यायाधीशों की वरिष्ठता सूची में 57वें स्थान पर हैं। उनकी असहमति से पता चलता है कि इस प्रक्रिया में कई अन्य वरिष्ठ और समान रूप से योग्य न्यायाधीशों की अनदेखी की गई। उन्होंने आगे बताया कि गुजरात उच्च न्यायालय का प्रतिनिधित्व पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और एनवी अंजारिया कर रहे हैं। न्यायमूर्ति नागरत्ना के अनुसार, उसी उच्च न्यायालय से तीसरे न्यायाधीश की नियुक्ति करने से संतुलन बिगड़ जाएगा, क्योंकि कई उच्च न्यायालयों का प्रतिनिधित्व नहीं है या उनका प्रतिनिधित्व कम है। न्यायमूर्ति नागरत्ना वर्तमान में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं। उनका कार्यकाल 2027 से शुरू होकर 36 दिनों का होगा।
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